Wednesday, December 12, 2007

अब मेरे लिंकित मन का क्या होगा ?

अपनी पिछ्ली पोस्ट में मैंने जब अपने शोध की अवधि के समाप्त होने की घोषणा करते हुए शोध के नतीजों का नमूना पेश किया तो बहुत सी बधाइयां और सराहना मिली  ! पर आलोक जी ने बधाई देते देते एक बहुत ही वाजिब शंका हवा मॆं उछाल दी कि अब लिंकित मन का क्या होगा ? जब मैंने यह काम शुरू किया था मुझे जरा भी आभास नहीं था कि यह काम इतना रोचक होगा और न ही यह पता था इस काम को करने के दौरान मेरा खुद का मन कितना लिंकित होगा ! आज मेरे शोध की अवधि खत्म हो गई है पर शोध की यह प्रकिया जारी रहने वाली है !आलोक जी, ब्लॉगों पर शोधपरक विचारों की इस खुली चौपाल ' लिंकित मन'  पर हिंदी ब्लॉग के विकास का इतिहास दर्ज होता रहेगा ! हिंदी ब्लागिंग पर शोध का यह काम सराय के सौजन्य से बहुत सही समय पर शुरू हुआ है ! इस काम की स्तरीयता का अनुमान तो भविष्य में ही हो पाएगा पर हिंदी चिट्ठाकारिता के इतिहास का दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया जारी रहनी भी बहुत अहम है ! अब तक लिंकित मन पर मैंने यथासंभव शोधपरक ईमानदारी को निभाया है ! आगे भी इस पहल को जारी रखा जाएगा ! लेकिन अब लिंकित मन मेरा निजी चिट्ठा न होकर एक सामूहिक प्रयास से हिंदी ब्लॉगित जाति के मन को लिंकित करने की एक कोशिश के रूप में सामने आएगा ! मैंने प्रारंभ से ही इस ब्लॉग को "हिंदी ब्लॉगों से संबंधित शोधपरक विचारों की एक खुली चौपाल " कहा है ! लिंकित मन पर लिखित चिट्ठों पर आईं टिप्पणियों के जरिए मुझे शोध की दिशा व उसके स्वरूप के बारे मॆं आप सबकी राय मिलती रही है और इस तरह यह शोध एकालाप और निष्क्रिय वैचारिक प्रलाप न होकर जीवंत और समसामयिक बना रहा !अब लिंकित मन का क्या होगा ?जैसा सवाल मेरे मन में अब तक नहीं उठा था क्योंकि इस काम से जुडाव- लगाव की स्थिति रही है और शुरू से ही यह काम  एक जारी रहने वले चिट्ठे के बतौर शुरू किया गया था ! वरना मैं शोध के लिए कोई और दबा छिपा परंपरागत तरीका भी अपना सकती थी ! शोध की औपचारिकताएं मात्र निभाई गईं हैं शोध तो लगातार जारी है आज भी ! 

मेरे द्वारा हिंदी चिटठाकारी के स्वरूप और विकास को समझने का प्रयास अब तक की हिंदी चिट्ठाकारिता के इतिहास को दर्ज करता है ! भविष्य की हिंदी चिट्ठाकारिता की समझ तभी बनेगी जब हम लगातार ब्लॉगित समाज के लिंकन के पैर्टनों और खासियतों को समझते चलें ! तो लिंकित मन पर आप सबका स्वागत है ! आप सभी अपने हिंदी ब्लॉगिंग के अनुभवों और ब्लॉगरी के बारे में अपनी समझ व  राय को लिंकितमन पर लिखिए ! लिंकित मन अब मेरा निजी चिट्ठा न होकर हिंदी ब्लॉगिया जाति के अंदाज को बयां करने का एक मिलाजुला कदम होगा ! तो फिर  आइए रचॆं हिंदी चिट्ठाकारिता का एक मौलिक मुहावरा और  रचॆं एक सामूहिक इतिहास !! आमीन !!

8 comments:

आलोक said...

इस लेख की चिप्पी १००० चिट्ठे क्यों है? चिट्ठे तो १,३६६ हैं आज। :)

बहरहाल लिंकित मन जारी रखने का शुक्रिया।

कृपया अपने लेख में ९-२-११ की कड़ी ठीक कर लें।

Raviratlami said...

चलिए, ये सुखद है कि लिंकित मन की शोध जारी रहेगी.

उम्मीद करते हैं कि किसी दिन ये शोध आपको डी.लिट्. की उपाधि दिलवा दे.

अरुण said...

हम भी शोधार्थियो पर शोध करना चाहते है पर फ़ैलोशिप की दरकार है मार्ग दर्शन करे..ताकी हम भी शोध कर पंगेबाजी मे डाक्ट्रेट हासिल कर डा. कहला सके...:)

Sanjeet Tripathi said...

सुम-आमीन!!

गलत तो नही लिखा न मैने?

बोधिसत्व said...

शोध जारी ही न रहे पूरी हो कर पढ़ने को भी मिले...

बाल किशन said...

बहुत ही सराहनीय और अद्भुत कदम है ये. मैं ऐसे प्रयास का स्वागत करता हूँ. और ये भी कहता हूँ की समय समय पर मेरे द्वारा इस विषय पर हो भी होगा आपको सूचित करूँगा. आख़िर नए की राय भी उतना ही महत्व रखती है जितना पुराने का अनुभव. एक बहुत बढ़िया दस्तावेज बनेगा ये.

पुनीत ओमर said...

नीलिमा जी, आपके इस नए प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाये.

गुस्ताख़ said...

नीलिमा जी, बहुत पहले मैंने सोचनीय( स्पेलिंग ठीक लिखी है) मुद्रा में तस्वीरें खिंचवाने वालों पर एक पोस्ट डाला था। मेरी खुद की तस्वीर पर कमेंटनुमा पोस्ट था। आपको भी इस मुद्रा में तस्वीर अंकवाने में बहुत सोचना पड़ा होगा.. है न?