Sunday, November 25, 2007

हरएक के भीतर चमकता हीरा है ,हरएक के भीतर आत्मा अधीरा है

शोध निष्‍कर्षमाला-1

हर भली बुरी चीज कभी न कभी खत्‍म होती ही है, मेरे शोध की अवधि भी समाप्‍त हो गई है जल्‍द ही शोध के निष्‍कर्ष विद्वत समुदाय के समक्ष प्रस्‍तुत किए जाएंगे।

हिंदी चिट्ठाकारिता पर मेरी शोध के सबसे दिलचस्प सवाल रहा -हिंदी में चिट्ठाकारिता क्यों ? या हिंदी चिट्ठाकार चिट्ठा क्यों करता है ? इसके कई संभावित जवाब मुझे मिले -

1  हिंदी चिट्ठाकारिता चिट्ठाकार की प्रबल अनुभूतियों के निर्बंध प्रस्फुटन का माध्यम है ! इस बात का पता सहज ही अहसास होता है जब हम हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के खुद के ब्‍लॉग विवरण देखते हैं. 

1 अनूप- हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?,

2   प्रत्यक्षा- कई बार कल्पनायें पँख पसारती हैं.....शब्द जो टँगे हैं हवाओं में, आ जाते हैं गिरफ्त में....कोई आकार, कोई रंग ले लेते हैं खुद बखुद.... और ..कोई रेशमी सपना फिसल जाता है आँखों के भीतर....अचानक , ऐसे ही

3    नोटपैड- इस ब्लॉग के ज़रिये अपनी कलमघ‍सीटी को ब्‍लॉगबाजी में   तब्‍दील करने का इरादा है। हम तो लिख्‍खेंगे, पढ़ना है तो पढ़ो वरना रास्‍ता नापो बाबा।,

प्रमोद, चुप रहें और सोचें.. सोच के सागर में उतर जायें.. और बाहर आयें तो कोई नाटकीयता न हो.. कुछ महीन चमक चमके.. तारोंभरी रोशन रात दमके.. और कदम आगे बढ़ें.. धीमे-धीम

5 सुनील दीपक- क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं था, या फ़िर समय नहीं था, या फ़िर ...?

2  यह सामाजिक जुडाव तथा सम्प्रेषण की उत्कंठा को जाहिर करने  का       सहज माध्यम है ! अविनाश, अभय, लाल्‍टू, रवीश, नसीर, रियाज आदि ब्‍लॉगरों को देखें !

3  हिंदी चिट्ठाकार के लिए यह वैयक्तिक जीवन और अनुभवों के दस्तावेजीकरण का जरिया है !

4  चिट्ठाकार के वैयक्तिक विचारों , मत और राय को सामाजिक मंच प्रदान करने और इस जरिए से उसे मुख्यधारा जीवन में  हस्तक्षेप की संतुष्टि देने वाला जनमाध्यम है !

5  चिट्ठाकार के रूप में एक आम व्यक्ति को नैतिक , भावात्मक और सामाजिक पुनर्बलन की क्रिया-प्रतिक्रिया को संभाव्य बनाने का प्रकार्य करता है!

6 व्यावसायिक चिट्ठाकारिता की भविष्यगत संभावना को साकार करने के लिए ! रवि, टिप्‍पणीकार, मजेदार समाचार आदि को इस दृष्टि से देखा जा सकता है !

7 संरचनागत दबावों से निपटने का तथा व्यवस्था के प्रति विरोध दर्ज करने का सशक्त तरीका है !

8 हिंदी भाषिक अस्मिता की विनिर्मिति में लोक की सहभागिता का सबसे तीव्र माध्यम है !

यहां दिए गए ब्लॉगिंग करने के कारणों को उत्प्रेरक भी कह सकते हैं ! इन उत्प्रेरकों को आंतरिक उत्प्रेरक और बाह्य उत्प्रेरकों के रूप में बाटां जा सकता है !

सबसे अहम बात यह है कि चिट्ठाकारिता के लिए आम व्यक्ति को किसी विशिष्ट तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं पडती ! पुशबटन किया और पब्लिश हो गया आपका विचार,खयाल और भाव ! संभवत: यही वह मुख्य कारण है कि कई नेट प्रयोक्ता सहज ही चिट्ठाकारी की ओर आकर्षित हो रहे हैं !दरासल हिंदी चिट्ठाकारी ने मुख्यधारा के बरक्स लोकमंच बनाया है !यहां रचनाकार ,संपादक ,पाठक ,पाठक सबका समाहार हो गया है ! यहीं से शुरू हो रहा है समानांतर मीडिया ,समानांतर साहित्य और समानांतर विमर्श  ! ब्लॉगिंग के माध्यम ने एक निष्क्रिय पाठक , एक निष्क्रिय सामाजिक को एक सक्रिय रचनाकार में परिवर्तित कर दिया है ! अब रिसीविंग एंड पर बैठा प्रत्येक व्यक्ति सक्रिय सृजक हो गया है !आनंद की बात यह है कि समानांतर धारा मुख्यधारा से बहुत अधिक तीव्र ,सहज ,सशक्त और भौतिक परिसीमन से परे है !हिंदी चिट्ठाकारिता ने सूचना और ज्ञान के प्रवाह में आम हिंदी भाषी की हिस्सेदारी और हस्तक्षेप को संभव कर दिया है !

 

5 comments:

बाल किशन said...

अच्छा विश्लेषण है.

अनूप शुक्ल said...

अगली माला का इंतजार है।

Sanjeeva Tiwari said...

हिन्‍दी चिट्ठे के लेखन के संबन्‍ध में आपके अधिकृत विचार सभी को शुरू से ही मान्‍य रहे हैं, अगली कडी का इंतजार है । हिन्‍दी चिट्ठाकारों के हिन्‍दी में कचरा लेखन के संबंध में भी कुछ चिट्ठो व पत्रिकाओं नें जो प्रश्‍न खडे किये हैं उनका भी उल्‍लेख व मंथन हो सके तो और अच्‍छा है ।

www.aarambha.blogspot.com

विपुल जैन said...

"6 व्यावसायिक चिट्ठाकारिता की भविष्यगत संभावना को साकार करने के लिए ! रवि, टिप्‍पणीकार, मजेदार समाचार आदि को इस दृष्टि से देखा जा सकता है !"

व्यावसायिक चिट्ठों का भविष्य है इसे नकारा नहीं जा सकता,

मगर एक बात, टिप्पणीकार द्वारा टिप्पणी टीपना, वो भी व्यावसायिक कार्य के लिए कितना नैतिक है।

टिप्पणी पर किस का कॉपीराईट है, चिट्ठा लेखक का, टिप्पणी करने वाले का, या किसी का नहीं।

क्या इस पुनः छापने की अनुमति लेना ज़रूरी नहीं।

Mired Mirage said...

आगे पढ़ने को उत्सुक हूँ ।
घुघूती बासूती